disease Moral Story in Hindi- “ सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ”

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What will people say is the biggest disease? motivational story

What will People Say disease ?

दोस्तों आज की हमारी कहानी है कि  “ सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ” (disease),आज यह रोग 90 % लोगो में पाया जाता है | तो आज हम इसी रोग को दूर भागने के लिए एक मोटिवेशनल स्टोरी लाये हे ,हमें आशा है कि यह motivational story आपको बहुत पसंद आएगी |

आज की दुनिया में सबसे ज्यादा सपने !

इसी बजह से टूटते है कि लोग क्या कहेंगे !!

why fear and disease in any work ? (किसी भी काम में डर क्यों ?)

दोस्तों ! हम कोई काम शुरू करने से पहले ही इस दुविधा में पड़ जाते हैं कि, ”लोग क्या कहेंगे”, “लोगों को क्या लगेगा” और इसी सोच की वजह से हम कुछ भी खुलकर और कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कर पाते | क्योंकि हम कोई भी काम करने से पहले कई बार लोगों के बारे में सोचते हैं, की अगर हम किसी काम में सफल नहीं हो पाए |

तो मेरे पड़ोसी, रिश्तेदार आदि , मेरे बारे में क्या सोचेंगे और इसी डर की वजह से हम कोई भी नया काम जो हमारी पसंदीदा ही क्यों न हो, हम वो काम करने से कतराते है और पीछे हठ जाते हैं। लेकिन दोस्तों ! अगर हमें जिंदगी में कुछ बड़ा काम करना हैं तो लोगों के बारे में सोचना छोड़ देना होगा।

“ सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ”

एक बार की बात हैं, सूरज नाम का व्यक्ति सुबह टहलने के लिए निकला । तभी उसने एक गली में एक लड़के को गली की सफाई करते हुए देखा।

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उस लड़के को वहाँ के कुछ कुत्ते जोर-जोर से भौंक रहे थे ।

सूरज ने उस लड़के की एक बात पर गौर किया कि वहाँ पर भौंकते हुये कुत्तो को देखकर उस लड़के के चेहरे पर न तो कोई डर था, और न ही उस लड़के का उन कुत्तो पर कोई ध्यान था। वह लड़का बस अपना मन लगाकर गली की सफाई का काम कर रहा था। अतः उस लड़के को इस बात का कोई डर नहीं था कि “लोग क्या कहेगे ” |

लेकिन इसी डर या दिमागी बीमारी (disease) की बजह से हम अपने कोई भी काम सही से नहीं कर पाते|

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जब वह लड़का वहाँ से दूसरी गली में सफाई करने गया तब सूरज भी उसके पीछे-पीछे गया।

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दूसरी गली के कुत्ते भी उस लड़के को देखकर भौंकने लगे। मगर वहाँ पर भी उस लड़के ने कुत्तो की तरफ ध्यान न देकर सफाई का काम करता रहा।

उस लड़के ने गली की सफाई करके कुछ रूपये कमा लिये और भौंकने वाले कुत्ते भौंकते रह गये |

blaming parsons (दोष देने वाले व्यक्ति)-

ये तो कुत्ते थे, लेकिन अपनी असल ज़िन्दगी में हमारे आसपास भौंकने वाले मनुष्यों की भी कोई कमी नहीं हैं, जो हमे हर पल नीचा दिखाना चाहते हैं। हमारे हर काम में टांग अड़ाते रहते हैं, तो हमे किसी की भी परवाह करने की जरुरत नहीं। हमे अपना काम अच्छे से करना हैं।

Moral:

जीवन में सफल और खुश रहना है तो एक काम अवश्य करे , लोग क्या सोचेंगे या लोग क्या कहेंगे सोचना छोड़ दो!

क्योकि लोग क्या सोचेंगे ये भी हम ही सोचेंगे ! तो यार लोग क्या सोचेंगे !!

जिंदगी में आप जो करना चाहते है उसे ज़रूर कीजिए, ये मत सोचिए की लोग क्या कहेंगे,
क्योंकि जब आप कुछ भी नहीं करेंगे तब भी लोग कहेंगे।

mean world !

खुद को काटकर रख दोगे, तो भी ये दुनिया आपसे खुश नहीं होगी,इसलिए वह करो जो मन चाहे !

न की जो दुनिया चाहे, क्योंकि दुनिया को बदलते वक़्त नहीं लगता जनाव!!

चार रिश्तेदार एक ही दिशा में तब चलते है! जब पांचवा व्यक्ति कंधे पर होता है!!
हम पूरी जिंदगी इसी बात में गुजार देते है की चार लोग या हमारे रिश्तेदार क्या कहेंगे!
और होता क्या है,अंत में चार लोग यही कहते है –
राम नाम सत्य है….राम नाम सत्य है….राम नाम सत्य है…!!

The end

और इसी के साथ इस रोग का भी अंत होता है कि “ सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ”

end of this thinking !

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