थॉमस अल्वा एडिशन की सफलता की कहानी

 आज हम ऐसे ही एक महान आदमी की कहानी बताने जा रहे है , जिसने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दम पर सफलता की बुलंदियो पर पहुंचने वाले व्यक्ति का नाम है थॉमस अल्वा एडिशन।आज थॉमस अल्वा एडिशन को कौन नहीं जनता है। एडिशन ने बल्ब का आविष्कार किया और आगे भी आविष्कार करते रहे। उन्होंने कई महत्वपूर्ण आविष्कार किये। जैसे कि इलैक्ट्रिक कार की बैट्री, मोशन पिक्चर्स, इलेक्ट्रिक पॉवर जनरेशन, मास कम्युनिकेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, और ना जाने ऐसे ही कितने आविष्कार किये।

अल्वा एडिसन की शुरूआती जीवन

थॉमस एडिशन का जन्म फरवरी 11, 1847 मे एक सामान्य परिवार में हुआ था। शुरू से ही उनका मन पढ़ाई – लिखाई में नही लगता था और वो अक्सर अपने क्लास में फेल हो जाते थे।
एक दिन की बात है स्कूल के प्रिंसिपल ने एडिशन को एक लेटर दिया और बोला कि ये लेटर तुम अपनी माँ को दे देना। स्कूल से आने के बाद एडिशन ने वो लेटर अपनी माँ को दे दिया और उनसे कहा की मुझे ये पत्र स्कूल के प्रिंसिपल ने दिया है। उनकी माँ प्रिंसिपल का दिया पत्र पढ़ने लगी और पढ़ते -पढ़ते आँखों से आंशु निकलने लगे।

पत्र में लिखा था- आपका बच्चा मंदबुद्धि है ये कभी भी पढ़ नहीं सकता इसके यहाँ पढने से हमारे स्कूल का नाम खराब होगा इसलिए हम आपके बच्चे को स्कूल से निकाल रहे है। ये पढ़ कर उन्होंने एडिशन को गले से लगा लिया। वो तुरंत अपनी माँ से पूछता है की इस पत्र में ऐसा क्या लिखा है जो आपकी आंखे नम हो गयी मुझे भी बताओ ।

फिर उनकी माँ ने वो पत्र दुबारा से खोला और जोर – जोर पढ़ने लगी ताकि एडिशन भी सुन सके की उसमे क्या लिखा है।

उन्होंने वो पत्र पढ़ा – आपका बेटा थॉमस अल्वा एडिशन एक जीनियस बच्चा है , बहुत ही ज्यादा होशियार है , और ऐसे जीनियस बच्चे को पढ़ाने के लिए हमारे स्कूल में कोई टीचर नहीं है। इस बच्चे को हम अपने स्कूल में नहीं पढ़ा सकते है , इसीलिए आप अपने बच्चे को अपने घर पर ही खुद पढ़ाइए ।

उसके बाद से एडिशन को उनकी माँ ने अपने घर पर ही पढ़ाना शुरू कर दिया। एडिशन ने भी मन लगा कर खूब मेहनत की और देखते ही देखते एक मंदबुद्धि बालक महान वैज्ञानिक बन गया।

बल्ब बनाने की कहानी

एक दिन की बात है एडिसन अपने लैब में बल्ब का आविष्कार कर रहे थे। तभी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि आपने करीब एक हजार प्रयोग किए लेकिन आपके सारे प्रयोग असफल रहे और आपकी मेहनत बेकार हो गई। क्या आपको दुख नहीं होता?
तब एडिसन ने कहा मैं नहीं समझता कि मेरे एक हजार प्रयोग असफल हुए है।

मेरी मेहनत बेकार नहीं गई क्योंकि मैंने एक हजार प्रयोग करके यह पता लगाया है कि इन एक हजार तरीकों से बल्ब नहीं बनाया जा सकता। मेरा हर प्रयोग, बल्ब बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है और मैं अपने प्रत्येक प्रयास के साथ एक कदम आगे बढ़ता हूं।
महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन बहुत ही मेहनती थे।कोई भी सामान्य व्यक्ति होता तो वह जल्द ही हार मान लेता लेकिन थॉमस एडिसन ने अपने प्रयास जारी रखे और हार नहीं मानी।

आखिरकार एडिसन की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ब का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रोशन कर दिया। यह थॉमस एडिसन का विश्वास ही था जिसने आशा की किरण को बुझने नहीं दिया और पूरी दुनिया को बल्ब के द्वारा रोशन कर दिया।

अगर दुनिया में किसी ने यह ठान लिया है कि मुझे अपने लक्ष्य तक पहुंचना है चाहे जो भी कठिनाई आये वो व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच ही जाता है।

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