Life changing real incident inspirational story with moral.

what is the mind power

What happened with the girl that night in the train (उस रात लड़की के साथ क्या ट्रेन में क्या घटना हुई ?)

कुछ स्टेशनों के बाद उसी डिब्बे मे कुछ शातिर बदमाश भी सवार हो जाते है.

लड़की के गले मे सोने चमकती चेन को देख कर बदमाह अरूणिमा की तरफ बढ़ने लगे,और गले की चेन खींचने का प्रयास किया, खूब हाता पाई हुई.

लेकिन लड़की अकेली थीं इस वजह से वो उनसे जीत ना पाई.

गुंडों ने चलती ट्रेन से लड़की को बाहर फेक दिया.

how painful that night must be (वो रात कितनी दर्द भरी होगी )

लड़की का एक पैर पटरियों की चपेट मे आने से ट्रेन का पहिया उसके पैरो को रौंदती हुई निकल गई.

लड़की दर्द से चिल्ला उठी,रात का समय था जगह बहुत वीरान थी दूर दूर तक कोई इंसान नहीं था, इस वजह से अरूणिमा की आवाज़ कोई सुन नहीं पाया.

लड़की ने बहुत कोशिस की लेकिन वो खुद को हिला भी नहीं पा रही थीं.. खून बहता रहा सारी रात ट्रेने टांगो के ऊपर से गजरती रही. एक टांग कट कर पूरी अगल हो चुकीं थीं.

खून की बदबू से चूहें वहाँ जमा हुए और कटे हुए मांस को कुतरना शुरू कर दिया.

सुबह ज़ब कुछ लोग वहाँ से गुज़र रहे थे तो उनकी नजर अरूणिमा पर पड़ी.

लड़की बेहोश पड़ी थी पर सांसे चल रही थीं. हालत बहुत दयनीय और दिल दहला देने वाली थी

लोगो ने तुरंत पास के hospitel मे एडमिट करवाया. खून चढ़ाया गया. पता चलने पर की अरूणिमा एक नेशनल प्लेयर है तो तुरंत परिजनों को सम्पर्क किया गया.

कुछ महीने ट्रीटमेंट चला. ट्रेन हादसे मे लड़की अपने दोनों पैर गवां बैठी थी डॉक्टर ने लड़की को दो नकली पैर लगवा दिए (आर्टिफिशल लेग्स) और डॉक्टर ने साफ बोल दिया की अब तुम्हे अपनी बाकी की जिंदगी इसी व्हील चेयर पर ही गुजारनी होगी.

Is the power of the national player still alive in him even today? (क्या आज भी उसके अंदर नेशनल प्लेयर की ताकत आज भी जिंदा)

दोस्तों ये वो सिच्वेशन थी जिसमे कोई साशरण कमजोर मन का व्यक्ति होता तो शायद सुसाइड कर चुका होता या सारी जिंदगी डिप्रेशन मे काट चुका होता. लेकिन इस लड़की के साथ ऐसा नहीं हुआ।

किस्मत ने तो जो करना था वो कर ही दिया था इस लड़की के साथ, पर वो कहते है ना की अगर एक रास्ता बंद होता है तो ईश्वर अनेक रास्ते खोल देता है.

इन्ही सोच के साथ लड़की के मन मे कुछ और ही विचार चल रहे थे….

इस लड़की को शायद ये मंजूर नहीं था की उसकी जिंदगी दूसरों पर बोझ बन कर रहे और उसकी जिंदगी दूसरों के सहारो की मोहताज़ बन कर रह जाए

तो फिर इस लड़की के दिमाग़ मे आखिर ऐसा क्या चल रहा था जो उसे ऐसा सोचने पर मजबूर कर रही थीं.

मैं अपने आगे के जीवन संघर्ष से लोगो की सोच बदल कर रख दूंगी की इंसान के इरादे ग़र मजबूत हो तो वो कुछ भी हासिल कर सकता है.

एक ट्रेन के दर्दनाक हादसे मे अपने पैर खो चुकीं इस लड़की के अंदर जिंदगी को फिर से एक नए सिरे से शुरू से करने की उम्मीद और आगे बढ़ कर कुछ बड़ा कर दिखाने का जुनून ये साबित कर चुका था की उसके अंदर एक नेशनल प्लेयर की ताकत आज भी जिन्दा है.

आखिर कार अरूणिमा ने फैसला किया, “वो करने का” जिसके बारें कोई साधारण इंसान सपने मे भी नहीं सोचता.

जी हाँ ये लड़की मन ही मन फैसला कर चुकीं थीं, तमाम चैलेंजिंग हिमालय चोटियों के साथ साथ दुनियां की सबसे ऊंची चोटी माउंटएवरेस्ट को भी फतेह करने का.

ये बात जैसे ही डॉक्टरों परिवारों को पता चली तो सब हैरान हो गए, कोई हसने लगा तो कोई उसे पागल कहने लगा. तो मजाक समझने लगा.

लेकिन इन लोगो की इस हसीं से इस लड़की के इरादे और मजबूत हो चुके थे.

इस लड़की का ये फैसला अब उसकी आगे की तकदीर लिखने वाला था

अपने यही सपने और बुलंद हौसले लिए यह लड़की, माउन्टएवरेस्ट फतेह करने वाली भारत की सबसे पहली महिला बिछेन्दरी पाल के पास ट्रेनिंग के लिए जाती है.

माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए

दो से तीन सालो की लम्बी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद यह लड़की अब पूरी तरह परफेक्ट थी माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए..

एक दिन यह लड़की पूरी टीम के साथ माउन्ट एवरेस्ट फतेह करने निकल पड़ी. कई दिन लग गए आखिर कार तमाम मुश्किलों के बाद सर चंद गिने चुने लोग ही माउन्टएवरेस्ट की चोटी तक पहुँच सके जिनमे स एक यह लड़की भी थी.

जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे है अरुनिमा सिन्हा की.

जिसने विकलांगता की स्थिति मे भी यह मुकाम हासिल कर के ये साबित कर दिखाया की मनुष्य शरीर से नहीं बल्कि मन से विकलांग होता है जो बस ना करने के बहाने खोजता रहता है वरना मनुष्य अपने आत्मविश्वास, जुनून, निरंतर प्रयास, सही दिशा मे मेहनत, और बुलंद हौसलो से जो चाहे वो हासिल कर सकता है

इस लड़की के इरादे टस से मस ना हुए

दोनों पैरों से विकलांग होने के बावजूद भी इस लड़की के इरादे टस से मस ना हुए हौसले इतने बुलंद की लाख तकलीफो के बावजूद भी अपनी कमजोरो को ताकत मे बदल कर दुनियां की सबसे ऊँची चोटी को माउन्ट एवरेस्ट को फतह कर डाला.

इस motivational story से हमें सीख मिलती है की गर हौसले बुलंद हो और कुछ करने की आग सीने मे लगी हो और मन मे जुनून सवार हो तो कुछ भी असम्भव नहीं.

moral of the story-

आप भी इससे प्रेरित होकर अपने मन मे जुनून पैदा करें और कामयाबी हासिल करें.

दोस्तों अगर आपको जीवान में कुछ बड़ा काम करके नाम बनाना हे तो लोगो की बातो पर ध्यान न दे क्योकि लोगो का काम ही हे कहना तुम कुछ न भी करोगे तो भी लोग कुछ ना कुछ कहेगे।

उम्मीद करता हूं दोस्तों इस short motivational story in hindi से आपको बहुत हिम्मत और हौसला मिला होगा. इस motivational and inspirational story को पढ़ने के बाद अब आपको अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं होगी.

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