12 Rules of Life Book Summary in Hindi

12 rules of life

हेलो दोस्तों आज हम जॉर्डन पीटरसन कि एक बेस्ट इंटरनेशनल सेलिंग बुक के बारे में बात करेंगे जिसका नाम है 12 रूल फॉर लाइफ।  इसके पहले ऑथर के बारे में थोड़ा बात कर लेते है। जॉर्डन पीटरसन एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट है, वे टोरंटो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और डॉ पीटरसन अपने ब्लॉग, पॉडकास्ट और ऑनलाइन कोर्स के जरिए लोगों को अपनी लाइफ ऑर्गेनाइज बनाने में मदद करते है। 

 यह बुक किसे पढ़नी चाहिए 

वह लोग जो प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, जो लोग हर जगह कमियां ढूंढते हैं जिन्हें नहीं पता है कैसे क्या करना चाहिए, कैसे खुश रहना चाहिए? यह सब आप इस किताब से सिख सकते है।  अगर आप इस बुक में बताए बातों को अपने लाइफ में अप्लाई करते हैं आप अपनी लाइफ को बेहतर बना सकते हैं आपको अंधेरे में भी उम्मीद की किरण नजर आने लगी। 

इंट्रोडक्शन

क्या आप हर रोज डिसऑर्डर,कन्फ्यूजन और  कभी न खत्म होने वाले प्रॉब्लम जैसे प्रॉब्लमस में खुद को फंसा महसूस करते हैं? आपको लगता है कि आप के रिश्ते खराब हो रहे हैं? और आपको भी लगता है कि जो भी आपके आसपास हो रहा है वह गलत हो रहा है तो यह बुक आपके लिए है। एक बेहतर ज़िन्दगी जीने के लिए डॉ पीटरसन ने12 रूल्स बताएं है। आपको यह बुक उन सभी तरीकों के बारे में सिखाएगी जिनसे आप अपनी लाइफ को बेहतर बना पाएंगे चलिए शुरू करते हैं

Rule 1.  स्टैंड अप स्ट्रैट विथ योर शोल्डर्स बैक  Stand Up straight with Your shoulder Back (FIX YOUR POSTURE)

 मनुष्यों सहित सभी जानवर एक दूसरे पर अपना अपना डोमिनेंस (दबदबा) बनाए रखना चाहते हैं। चलिए इसे एक लॉबस्टर यानि केकड़े के एग्जांपल से समझते हैं। डोमिनेंस के लिए लड़ाई में दोनों केकड़े अपने शरीर/पंजे के आकार और हार्मोन्स (जो उनके स्वास्थ्य, शक्ति और मनोदशा का संकेत देते हैं) का  उपयोग करके एक दूसरे को बहुत बड़ा दिखाते हैं। केकड़े में सेरोटोनिन का स्तर अधिक होता है। 

सेरोटोनिन एक हैप्पी हार्मोन है। यह आपकी नसों को आराम देता है, उन्हें रिलैक्स करने में मदद करता है।  इस हार्मोन की वजह से आपको अच्छे थॉट्स आते है 
डोमिनेंट लॉबस्टर्स में सेरोटोनिन का स्तर अधिक होता है, अधिक आत्मविश्वास, बेहतर पोस्चर, और लंबे समय तक लड़ सकते हैं। एक अल्फा लॉबस्टर आमतौर पर शारीरिक रूप से लड़ने के बिना भी “जीतता है”।

प्रत्येक लड़ाई के बाद, एक केकड़ा मस्तिष्क बदल जाता है – हारने वाला आगे के लड़ाई से बचता है, जबकि विजेता को और भी अधिक आत्मविश्वास और सेरोटोनिन का स्तर प्राप्त होता है। इसी तरह के पैटर्न अन्य जानवरों की प्रजातियों में पाए जा सकते हैं – आम तौर पर, मजबूत जानवरों को अधिक भोजन, बेहतर “घर”, उच्च स्थिति, बेहतर साथी और दूसरों से अधिक सहयोग मिलता है। दुर्लभ संसाधनों को बांटने का यह प्रकृति का तरीका है।

इसी तरह, इंसानों के दिमाग में एक डोमिनान्स डिडेक्टर होता है। हम अपनी सामाजिक/आर्थिक स्थिति को कैसे देखते हैं, यह हमारी स्टेटस  को प्रभावित करता है जो सकारात्मक प्रतिक्रिया में हमारी स्थिति की पुष्टी करता है।

• मजबूत आत्म-सम्मान (self esteem) वाले लोग सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना को महसूस करते हैं करते हैं, जो उन्हें अधिक आकर्षक और सम्मानित बनाता है। इससे उनकी प्रोडक्टिविटी और कल्याण में सुधार होता है, जो उनकी सेल्फ परसेप्शन को और मजबूत करता है। 
• दूसरी ओर,कम सेल्फ परसेप्शन (कम आत्म-धारणा) वाले लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। उनके तनावग्रस्त, Jumpy और रिएक्टिव  होने की अधिक संभावना होती है। वे खराब निर्णय लेते हैं, सम्मान/संसाधनों को नियंत्रित करने में विफल होते है। 
संक्षेप में, हमारी आत्म-धारणा उन वाइब्स को प्रभावित करती है जो हम एक आत्म-सुदृढ़ लूप बनाने के लिए संचारित करते हैं। यदि आप किसी भी कारण से हारे हुए की तरह महसूस करते हैं, तो पहला कदम अपनी बॉडी पोस्चर को सही करके नकारात्मक चक्र को तोड़ना है।

• झुकें नहीं। यह हार और एक निम्न स्थिति का संदेश देता है, जो दूसरों को आपके साथ खराब व्यवहार करने और आपकी लौ सेल्फ परसेप्शन  को  बढाने के लिए प्रेरित करता है।

• अपना पोस्चर फिक्स  करें। सीधे खड़े हो जाएं, अपने कंधों को पीछे धकेलें, सही से बोले और ऑय कांटेक्ट  बनाएं। यह अपने और दूसरों के लिए आत्मविश्वास का संकेत देता है। आप बेहतर महसूस करेंगे, दूसरे आपको अधिक सम्मान देंगे।

Rule 2. अपना ख्याल रखें, जिस तरह आप किसी और की देखभाल करते हैं 
(Take Care Of Yourself, The Way You Would Take Care of Someone Else)

अपने बहुत से लोगों को देखा होगा कि जब वे थोड़ा बीमार होते हैं तो वह डॉक्टर के पास चले जाते हैं लेकिन जब उन्हें दवाई लिख कर दी जाती है तो उसे खरीदते भी नहीं है। जो लोग पैसे की कमी से दवाई नहीं खरीदते उनकी बात अलग है। कुछ लोगों को लगता है की बीमारी वैसे ही ठीक हो जाएगी दवाई खाने की क्या ही जरूरत है। 

 यह कितने आश्चर्य की बात है ना कि जब हमारे पालतू जानवर बीमार पड़ जाते हैं तो हम उनका कितना ख्याल रखते हैं।  उन्हें डॉक्टर के पास ले जाते हैं उन्हें समय-समय पर दवाई देते हैं। 

और यह बिल्कुल ऐसा ही होता है जब हमारा अपना कोई बीमार होता है हम उन्हें डॉक्टर के पास ले जाते हैं, भले ही हमारे पास पैसे हो या ना हो हम कहीं से अरेंज करते हैं। ऐसा लगता है हमें अपने हेल्थ से ज्यादा उनकी हेल्थ की चिंता है। हम उनके बहुत अच्छे से टेक केयर करते हैं। और समय से दवाई खिलाते हैं। वह सब कुछ करते हैं जिससे वह जल्दी ठीक हो जाये। 

तो इससे आप क्या समझे हम दूसरों की तो परवाह करते हैं लेकिन खुद की नहीं। आपको खुद को भी उतना ही प्यार करना सीखना होगा जितना आप अपने फैमिली से करते हैं। Exercise को अपना लाइफ का पार्ट बनाएं। अच्छी डाइट फॉलो करें और हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहें। अगर आपने अपने को कंट्रोल करना सीख लिया तो आपकी लाइफ कितनी बदल जाएगी। अगर आप हेल्दी और खुश होंगे तो इसका पॉजिटिव असर आपके लाइफ को पॉजिटिविटी से भर देगा। 

Rule 3. ऐसे लोगों को दोस्त बनाये जो आपके लिए अच्छा चाहते हो (Surround yourself with people who want the best for you)

आपको अपने आप को ऐसे लोगों के साथ रखना चाहिए जो आपको सच में सपोर्ट करते हैं, जो आपको सफल देखना चाहते हैं। आप एक दूसरे को और अधिक ऊंचाइयों पर देखना चाहोगे।  आपके आपके जीवन में सुधार होता है क्योंकि आपके दोस्त के जीवन में सुधार होता है। वे आपकी नींदकता को बर्दाश्त नहीं करेंगे।  और जब आप कुछ गलत करेंगे तो आपके अच्छे दोस्त आपको दंडित भी करेंगे। 

अब कैसे लोगों के साथ रहना चाहते हैं ऐ आपकी चॉइस है आपको हमेशा ऐसे लोगों के साथ रहना चाहिए जो पॉजिटिव सोच रखते हैं जो लाइफ में आपको आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर करते हो। अच्छे लोगों के साथ रहने से आप खुद को दुख और तकलीफ से बचा सकते हैं।  लाइफ में पर्पस होना बहुत जरूरी है क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। अच्छे दोस्तों। आपके लाइफ में मीनिंग ढूंढने में मदद करेंगे।  अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका जिंदगी प्यार और खुशियों से भर जाएगी। 

Rule 4 .अपनी तुलना अपने पिछले कल से करें न कि दूसरें से जो आज है (Compare yourself to whom you were yesterday, not to who someone else is today)

सोशल मीडिया के होने से सब कुछ दिखता है कुछ भी छिपता नहीं है जब आप सोशल मीडिया पर इस्तेमाल करते है तो आप अपने दोस्तों के पोस्ट देखते हैं उनमें से कुछ दोस्त यूरोप में वेकेशन मना रहे हैं, तो कुछ को प्रमोशन मिला है, कुछ को लाइफ पार्टनर मिल गया है और उनकी शादी हो गई है।  किसी को अपने फील्ड में अवार्ड मिला है और कुछ ने नहीं अपनी मास्टर डिग्री कम्पलीट  कर लिया है।  
और आप अपने आपको उनसे कम्पेयर करने लगते हैं की कहा वह लाइफ मजे कर रहे हैं और आप जो अपने अस्त-व्यस्त और गंदे अपार्टमेंट में अपनी घर अकेले बैठे हुए हैं आप बहुत इनसिक्योर और जलन फील करने लग जाते हैं। 


ऑथर का कहना है कि बहुत आसान है अपने को सक्सेसफुल लोगे से कंपेयर करना और अपने आप को नकारा और यूजलेस समझना। आप भले ही किसी स्किल के महारथी क्यों न हो आपको कोई ना कोई ऐसा आदमी जरूर मिल जाएगा जो आप से बेहतर है। अगर आप एक म्यूजिशियन है तो आपको खुद को द ग्रेट मोजार्ट से तुलना न करें। अगर आप एक शेफ है  तो खुद को मास्टर शेफ गॉर्डन रामसे से कंपेयर मत कीजिए।


 आपके पास अपने यूनिक स्किल है। “आप उनसे अलग है उन से कम नहीं”। आप खुद में एक कमाल के इंसान हैं आप जैसा है खुद को वैसे ही एक्सेप्ट करें आपके पास जो स्किल  है उसे इंप्रूव करें। आपको आप जो कल थे उस से बेहतर बनने की कोशिश करें अपने से सक्सेसफुल लोगों से तुलना  करके अपने आप को दुखी ना करें। 

Rule 5. अपने बच्चों को ऐसा कुछ न करने दें, जिससे आप उन्हें नापसंद करने लगें 

(Do not let your children do anything that makes you dislike them)

एक बार ऑथर ने एक एयरपोर्ट पर देखा कि एक 3 साल का बच्चा अपने पेरेंट्स के पीछे पीछे रोते हुए जा रहा था। उसके पेरेंट्स उसे अनदेखा कर रहे थे और वह बहुत शर्मद शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे ,वे बस आगे चलते जा रहे थे और बच्चे उनके पीछे पीछे होते जा रहा था।  वह सिर्फ उनका ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता था हो सकता है उसे कुछ चाहिए था लेकिन क्योंकि उसके पेरेंट्स उस पर ध्यान नहीं दे रहे थे। इसलिए और जोर से रो रहा था। आसपास के सारे लोग देख रहे थे। 
अगर उसके पेरेंट्स एक बार रुक कर उसकी पूरी बात सुन लेते , उससे बात करते  तो प्रॉब्लम वहीं पर सॉल्व हो जाती और बच्चा रोना बंद कर देता।  

अगर आप एक पैरंट है तो आपने ऐसा जरूर एक्सपीरियंस किया होगा। क्योंकि बच्चे शैतानी करेंगे क्योंकि वो नासमझ है। बच्चे को कैसे और क्या सिखाना यह आपकी जिम्मेदारी है। आप अपने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं यह डिसाइड करेगा कि दूसरे उसे कैसे ट्रीट करेंगे। अगर आप उसे मारेंगे पीटेंगे और हमेशा डाटते  रहेंगे तो दूसरे से उससे अच्छा व्यवहार करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। शांत और जिम्मेदार पेरेंट्स एक  डिसिप्लिन बच्चों को बड़ा करते हैं। 

रिसर्च से यह बात सामने आई है कि अपने बच्चों को नई चीजें सीखने और जानने के लिए खुला छूट देना चाहिए लेकिन एक क्लियर लिमिट सेट करें। अगर कुछ गलत करता है तो उसे रोके और समझाएं क्या सही है और क्या गलत है। उनकी गलतियों को नजरअंदाज ना करें नहीं तो आपका बच्चा और भी बिगड़ता चला जाएगा और वह कभी सही और गलत फर्क नहीं समझ पाएगा। 

अपने बच्चों के साथ समय बिताएं। उसे समय पर अपना पूरा ध्यान बस उस पर रखें। उसे इस बात का एहसास कराऐ  कि आप उससे प्यार करते हैं और आपके लिए कितने इम्पोर्टेन्ट है।  इससे आपके बच्चे का साथ है गहरा रिश्ता और कनेक्शन बनेगा। और वो उस बच्चे को गलत करने से रोक सकता है। उन्हें मारने डांटने या सजा देने से आप यह कभी हासिल नहीं कर पाएंगे।

 अपने बच्चे के बात ध्यान से सुने। आप जितना शांत और जिम्मेदार होंगे आपका बच्चा भी उतना ही हैप्पी और disciplined बनेगा। टीचर और क्लास के बच्चे उन्हें पसंद करेंगे।  बच्चे का ऑल राउंड डेवलपमेंट होगा। 

Rule 6. दुनिया की आलोचना करने से पहले अपने आप को देखें  (Set your house in perfect order before you  criticize the world)

हम सब की लाइफ में कभी न कभी एक ऐसा समय जरूर आता है जब हम निराश होकर सोचते हैं कि दुनिया में क्या हो रहा है। हर तरफ करप्शन ही करप्शन है। हम न्यूज़ में देखते हैं कहीं जंग हो रहा है, कहीं भूकंप तो कहीं सुनामी ने तबाही मचा रखा है। कहीं बेरोजगारी और गरीबी से दुनिया परेशान है। 

अगर इस तरह से देखा जाए तो दुनिया सच में एक मायूस जगह है। आप इसे किस नजरिए से देखते हैं वह आप पर डिपेंड करता है दुनिया की कमियों और बुराइयों के बारे में सोचने से पहले अपने आप को ठीक करने की कोशिश करें। जब तक आप खुद को ही नहीं बदलेंगे तो दुनिया में बदलाव क्या लाएंगे।

जिन चीजों को आप कण्ट्रोल नहीं कर सकते हैं इनके बारे में सोचकर आप परेशान ना हो। चेंज की शुरुआत अपने आप से करें क्या आप अपना बेस्ट कर रहे हैं ? क्या आप अपने फैमिली को प्यार और रिस्पेक्ट देते हैं? क्या आप अपनी बुरी आदतों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं?

 एग्जांपल के लिए एंटोन चेखॅाव व की बात करते हैं उनके पिता को शराब पीने की आदत थी। वह नशे की हालत में रोज अपने बच्चों को मारते थे। उनका परिवार गरीब था और वह एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे। इनके भाई बिल्कुल अपने पिता की तरह हो गए थे। 

लेकिन इन्होने बहुत मेहनत की। उन्होंने पढ़ाई में ध्यान लगाया और स्कॉलरशिप हासिल की। उन्होंने खुद पर अपने माहौल का असर नहीं होने दिया। अपनी अपनी सोच को पॉजिटिव खते हुए एंटोन ने एक मिसाल कायम की उन्होंने अपने भाई को भी बदलने के लिए इनकरेज किया। अपने घर के माहौल और सिचुएशन को बदला। आगे चलकर एंटोन बहुत सक्सेसफुल राइटर बने। 

Rule 7. वह हासिल करने की कोशिश करें, जो अर्थपूर्ण हो, न कि वह जो सुविधाजनक हो (Pursue what is meaningful, not what is expedient)

जब हमारे लाइफ में कोई मुश्किल घड़ी आती है तो हमारा रिएक्शन आना नेचुरल होता है। परेशान होना और शिकायत करना भी आम बात है। लेकिन ऐसा करने से इंसान अपनी तकलीफ और मुसीबत को बढ़ा देता है। इसके बजाए अगर वह शांत होकर अपने इमोशन को कंट्रोल कर लेगा तो प्रॉब्लम का कोई ना कोई हल ढूंढ सकता है। लेकिन हड़बड़ा जाना गैर जिम्मेदार इंसान की निशानी है। 

आपका क्या बिलीफ सिस्टम है आपका लाइफ में क्या परपस है आपके अपने लाइफ का परपस और मीनिंग सोचना होगा।  जब आप किसी मकसद को पूरा करने में अपनी लाइफ लगाएंगे तब आप देखेंगे कि आप ज्यादा ऑर्गेनाइज हो गए हैं 

Rule 8 .  सच बोलें – या, कम से कम, झूठ ना बोलें (Tell the truth- or, atleast, don’t lie)

ऑथर कहते है की एक समय था जब वो अपनी वाइफ के साथ एक छोटे से अपार्टमेंट में रेंट पर रहा करते थे उनका मकान मालिक डेनिस था  जिसे शराब पिने की लत थी। वो अपने काम के समय को छोड़कर पूरा दिन नशे में धुत रहता था कई बार तो वो सिर्फ़ दो ही दिन में बीयर की 60 बोतल पी जाता था। वह अपने सारे पैसे शराब में उड़ा देता था जब कभी उसके पैसे और शराब ख़त्म हो जाते तो वह ऑथर का दरवाज़ा खटखटा देता था चाहे आधी रात ही क्यों न हो रहा हो और साथ में वो माइक्रोवेव, टोस्टर लेके आता था और उसे ऑथर यानि की जॉर्डन को बेचने की कोशिश करता थे। जॉर्डन ने एक दो बार उसका सामान खरीदा भी। 

लेकिन जॉर्डन की वाइफ का कहना था कि डेनिस को ये सब करना बंद करना होगा। जॉर्डन बहुत नर्वस थे।  वह नशे में धुत एक शराबी को कैसे समझा पाएँगे कि ये सब अब नहीं चल सकता।  फ़िर जॉर्डन ने सच बोलने का फ़ैसला किया। उन्होंने डेनिस को सीधे सीधे कह दिया कि वो कोई सामान नहीं खरीदना चाहते। उन्होंने उसे समझाया कि उसकी भलाई इसी में है कि उसे और पैसे ना दिए जाएँ। जॉर्डन ने जो हकीकत था उसे साफ़ साफ़ बता दिया। 15 सेकंड तक डेनिस जॉर्डन को देखता रहा और उसके मन को पढ़ने की कोशिश करता रहा। उसने जॉर्डन के शब्दों में सच्चाई और इमानदारी को महसूस किया  फ़िर वो मुड़ा और वह से चला गया। डेनिस ने फ़िर कभी जॉर्डन को कुछ भी बेचने की कोशिश नहीं की।

अगर आपका जीवन वैसा नहीं है, जैसा यह हो सकता है, तो सच बोलने का प्रयास कीजिए। अगर आप खुद को कमजोर, हताश, ठुकराया हुआ और उलझन में महसूस करते हैं सच बोलने का प्रयास कीजिए। झूठ से सिर्फ़ एक और प्रॉब्लम खडी हो जाती है। भले ही वो किसी की फीलिंग्स को हर्ट ना करने के लिए बोला गया हो, वो फ़िर भी झूठ ही होता है।

 Rule 9. यह मानकर चलें कि आप जिस व्यक्ति से बातचीत कर रहे हैं शायद वह कुछ ऐसा जनता हो, जो आपको न पता हो  

बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें किसी ऐसे इंसान की ज़रुरत होती है जो उन्हें सुनें और समझे  क्योकि वो खुद को वो बहुत अकेला महसूस करते हैं। ऐसे लोग सिर्फ़ अपने मन की बात कहना चाहते हैं लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता और अगर  ऐसा बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो ये मानसिक रोग यानि कि डिप्रेशन का रूप ले  लेता है। 

अगर आप ऐसे लोगों से कुछ कहते भी नहीं, सिर्फ़ उन्हें ध्यान से सुनते हैं तो आप उनकी बहुत मदद कर सकते हैं। उसे ये जताएं कि आपको उसकी परवाह है और आप उसकी कंडीशन को समझने की कोशिश कर रहे हैं।  इसे बिना शब्दों के कम्यूनिकेट व संवाद करना कहते हैं। बोलने वाला आपके हाव भाव से समझ जाता है कि आप उसकी बात ध्यान से सुन रहे हैं या नहीं, आपको उनसे हमदर्दी है या नहीं या आप भरोसा करने लायक हैं या नहीं। अगर आप उसे कोई सलाह नहीं भी देते तो उसे बोल कर अपने  मन को हल्का कर लेने दीजिये क्योकि अक्सर ऐसे लोग ख़ुद अपने प्रॉब्लम का सोलुशन ढूंढ लेते हैं इसलिए उन्हें सिर्फ़ पूरे ध्यान से सुनें।

Rule 10. सटीक और स्पष्ट शब्दों का उपयोग करें (Be precise in your speech)

जब हम अपने प्रॉब्लम को पहचान नहीं पाते तो वो धीरे धीरे और ज़्यादा बड़ी और बत्त्तर होने लगता है। अगर आप किसी प्रॉब्लम की जड़ को नहीं समझ पाए तो आप उसे कभी हल भी नहीं कर पाएँगे। यही कारण है कि हमें बहुत सोच समझ कर बोलने की ज़रुरत है।  यह मत कहिये कि सब कुछ गलत है लेकिन यह भी मत कहिये कि कुछ भी गलत नहीं है। बढ़ा चड़ा कर या कम कर के नहीं बल्कि जो प्रॉब्लम है बस वही बोलिये।  एक बार जब आप प्रॉब्लम को पहचान लेते हैं तब आपको समझ में आ जाता है कि उसे कैसे सोल्व करना है।

Rule 11.जब बच्चे स्केटबोर्डिंग कर रहे हों तो उन्हें परेशान न करें

जॉर्डन पीटरसन यूनिवर्सिटी की एक बिल्डिंग में बच्चों को स्केटबोर्डिंग करते हुए देखते थे। वहां काफी खुली जगह थी। सीढ़ियों की रेलिंग पर बच्चे अलग अलग करतब किया करते थे। सड़क के दूसरी तरफ एक प्लेग्राउंड था जहां बच्चों के जाने पर लोकल गवर्नमेंट ने रोक लगा दी थी।  उस जगह को चारों ओर से बंद कर दिया गया था। बड़ों का कहना था कि स्केटबोर्डिंग बच्चों के लिए काफी खतरनाक होती है। 

लेकिन पीटरसन इससे सहमत नहीं थे उनका था कि प्रैक्टिस करने से बच्चे किसी चीज में मास्टर बन सकते हैं उन्हें प्रैक्टिस करने से रोकना नहीं चाहिए और इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्केटिंग करते वक्त वह कई बार गिरते हैं और उन्हें काफी चोट आती है लेकिन बच्चे हमेशा उठकर दोबारा कोशिश करते थे अगर उनके खेलने पर ही रोक लगा दी गई वो कभी नहीं सीख पाएंगे। 

बहुत सरे माता पिता अपने बच्चों के प्रति ज़रुरत से ज़्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं। वो अपने बच्चों पर कई चीज़ों की पाबंदी लगा देते हैं और वो हमेशा बीच में आकर बच्चे की प्रॉब्लम को सोल्व कर देते हैं। इसका रिजल्ट ये निकलता है कि बच्चा डरपोक और अंदर से कमजोर हो जाता है। वो अपने पेरेंट्स की मदद पर आश्रित हो जाता है और वो वो ख़ुद कोई डिसिशन नहीं ले पाता। 

ऐसा अपने बच्चे के साथ ना होने दें। अगर आपके बच्चे का अपने फ्रेंड के साथ झगड़ा हो जाता है तो उसकी बात ध्यान से सुनें लेकिन उन दोनों के बीच आप इंटरफेयर नहीं करें और ना ही आप उसकी प्रॉब्लम को हैंडल करें, ये काम उसे खुद करने दें।  इससे आपके आपके बच्चे को ख़ुद ये  पता  चलता है कि उसे क्या करना चाहिए। इससे उसमें कॉन्फिडेंस ड़ेवलप होने लगेगा और वो किसी पर आश्रित होने की बजाय प्रॉब्लम को हैंडल करना सीख जायेगा।

Rule 12. जीवन में अच्छी चीजों की सराहना करें (Take time to appreciate the good things in life

हम सब अपने लाइफ में बहुत बिजी रहते हैं हम हमेशा भागते ही रहते हैं हम में से कोई रुकना नहीं चाहता। लेकिन थोड़ा रुकना बीच-बीच में बहुत जरूरी होता है। अगर सिर्फ दौड़ते ही जाएंगे तो लाइफ की कार आउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है। 

एक बहुत ही अच्छा कहावत है “स्टॉप एंड स्मेल द फ्लावर्स” इसका मतलब है ठहराव । ठहराव भी बहुत जरूरी है। हम सब तो हमेशा बिजी ही रहने वाले हैं। हम ना जाने कितने काम और कितनी जिम्मेदारियों में फंसे हुए हैं। हमें रूक कर सोचने और सांस लेने का मौका नहीं मिलता। 

तो जिंदगी जो छोटी छोटी खुशियां लेकर आती है इंजॉय करने के बारे में है हो। सकता है कि घर लौटते वक्त आपको सड़क पर बरात दिख जाए और आप जाम में फस जाए तो परेशान होने की वजह आप थोड़ा रुक कर वहां जो लोग डांस कर रहे हैं बस उन्हें देखकर स्माइल कर ले या हो सके तो खुद डांस कर ले। आपको अच्छा लगेगा क्यों की समय तो उतना ही लगना है। 

अपने चेहरे पर स्माइल लाना सीखें।  अगर आप रिलैक्स हो कर थोड़ा हैप्पी हो जाएंगे तो बात कुछ और है आप प्रकृति की खूबसूरती को निहार सकते हैं जो की बहुत सुंदर है लेकिन यहां रुकने का वक्त इसके पास है, है ना। 

आपके पास जो छोटी-छोटी चीजें हैं उन्हें अप्प्रेसिअट करें, अपनों के लिए समय निकालें उनके साथ समय बिताएं।  बिना रुके लगातार काम करते रहेंगे तो आपकी बॉडी और माइंड थक जाएंगा । काम में आपकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाएगी आप सिर्फ एक मशीन बन कर रह जायेंगे। बस अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। 

Conclusion (निष्कर्ष) 

तो आपने इस बुक के 12 रूल्स को पढ़ा जो आपकी लाइफ ऑर्गेनाइज करने में बहुत मदद करेंगे। इन्हें एक-एक करके अप्लाई करना की आदत डाले। सबसे पहले बिना झुके स्ट्रैटे  खड़े होने की आदत डालें। औरो के साथ साथ अपना भी ध्यान रखना शुरू करें। अच्छे लोगों से दोस्ती करें। अपने स्किल की को इंप्रूव करें करने की कोशिश करें। एक  जिम्मेदार पैरेंट बने। पहले खुद की कमियों और दोष को दूर करें। अपने घर को ठीक करें ,एक मीनिंग फुल लाइफ जीने के लिए लाइफ में अपना पर्पस  ढूंढ हमेशा सच बोले दूसरों की बात सुनना  भी जरूरी है इसलिए एक अच्छे लिसनर बने।  प्रॉब्लम की जड़ से समझने की कोशिश करें। अपने बच्चों को खुला छोड़े उन्हें सिखने दे। 

 इस बुक के बारे में  क्या सोचते हैं हमें कमेंट करके जरूर बताएं

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