Atomic Habits Book Summary in Hindi

Atomic Habits

About The Book

क्या आपमें कुछ बुरी आदतें हैं जिन्हें आप बदलना चाहते हैं अगर आपका जवाब हां है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, क्योंकि आप अकेले नहीं है जिसके पास कोई बुरी आदत हो।  क्योकि हम सब में कुछ ना कुछ बुरी आदतें होती है। इस किताब के लेखक जेम्स क्लियर उन सभी बातों और तरीकों के बारे में स्टेप बाय स्टेप बताएं हैं। 

जिनकी मदद से आप यह सीखेंगे कि आप कैसे एक अच्छी  हैबिट बना सकते हैं, कैसे अपनी किसी बूरी हैबिट को खत्म कर सकते हैं। और कैसे अपने छोटे-छोटे बिहेवियर में बदलाव करके आप एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी रिजल्ट पा सकते हैं

यह आपके विल पावर और अपने अंदर जोश पैदा करने जैसी Quality को डेवलप करना सिखाएगा। आप अपने आप पर विश्वास करना सीख जाएंगे। 

अगर आप अपनी लाइफ में कुछ ज्यादा अच्छा बदलाव करना चाहते हैं तो आपको इसे जरूर पढ़ना चाहिए। एटॉमिक हैबिट्स कहती है कि आप प्रतिदिन कुछ अच्छा और बेहतर हो सकते हैं। 

इस किताब को उन सभी लोगों को पढ़ना चाहिए जिन्हें कुछ बुरी आदत है और जो लोग खुद को बेहतर बनाना चाहते हैं। जो लोग लंबे समय से एक अच्छे हैबिट बनाना चाहते है पर उन्हें नहीं पता कि अच्छी हैबिट बनाई कैसे जाती है, तो यह बुक आपको डेफिनेटली हेल्प करेगी। 

About Author 

जेम्स क्लियर एक राइटर और मोटिवेशनल स्पीकर है वह अपनी किताब, वेबसाइट और समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों की मदद करते रहते हैं। 

           अगर आप अपनी किसी हैबिट को लंबे समय से बदलना चाहते हैं लेकिन आप से बदल नहीं पा रहे हैं तो प्रॉब्लम आप में नहीं बल्कि उस सिस्टम में है जिसे आप फॉलो करते आए हैं। यहां आपको एक प्रूवन सिस्टम मिलेगा जिसे फॉलो करके आप नई बुलंदियों को छू सकते हैं।

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Why tiny changes makes a big differences क्यों छोटे-छोटे बदलाव से बड़ा फर्क पड़ता है?

1) The Surprising Power of Atomic Habits (एटॉमिक हैबिट की आश्चर्यजनक शक्ति)

कल्पना कीजिए कि एक प्लेन लॉस एंजिल्स से न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भर रहा है। यदि, टेकऑफ़ के दौरान, पायलट 3.5 डिग्री प्लेन को साउथ में मोड़ देता है तो विमान की नोज थोड़ा हिल जाएगी, बस कुछ फीट। कॉकपिट के बाहर, से कोई भी इस छोटे बदलाव को नोटिस नहीं करेगा।  लेकिन  पूरा यात्रा के दौरान इसका प्रभाव  बहुत ज्यादा होगा। और ये परिवर्तन इतना ज्यादा हो जायेगा कि आप न्यूयोर्क नहीं बल्कि वाशिंगटन, डीसी पहुच जायेंगे। 

हम छोटे बदलावों पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि उनका तत्काल प्रभाव लगभग ना के बराबर होता है। आज अगर आप आउट ऑफ़ शेप है या मोटे है, और 20 मिनट के लिए सैर पर जाते है तो आप कल भी आउट ऑफ़ शेप ही रहेंगे। 

इसके विपरीत, यदि आप रात के खाने में फॅमिली साइज का पिज़्ज़ा खाते हैं, तो इससे आपका आपके वजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

लेकिन अगर हम हर दिन छोटे-छोटे आदतें दोहराते हैं तो इसका कंपाउंड इफेक्ट समय के साथ बहुत ज्यादा होता है। अगर आप हर दिन पिज्जा खाते हैं तो आप डेफिनेटली मोटे हो जाएंगे ठीक इसी तरह अगर आप हर रोज जोगिंग पर 20 मिनट के लिए जाते हैं तो आप पतले और फुर्तीला हो जाएंगे।  भले ही आप नोटिस ना करें आप धीरे-धीरे पतले होते जाएंगे। 

देखिए जो बदलाव्  होता है बहुत थोड़ा-थोड़ा होता है जिसे नोटिस करना मुश्किल होता है। 

यदि आप अपने लाइफ में पॉजिटिव चेंज चाहते हैं तो आपको यह समझना बहुत जरूरी है बदलाव के लिए आपको धैर्य के साथ साथ विश्वास भी रखना होगा कि आपकी आदतें  सही दिशा में है। भले ही आप इसका तुरंत रिजल्ट नहीं दीख रहा हो।  

अगर आप अपने आप को रोजाना १ परसेंट इंप्रूव करते हैं तो साल के अंत में आप पहले से 37 गुना ज्यादा बेहतर हो जाएंगे। जिस तरह पैसा टाइम के साथ-साथ कंपाउंड इंटरेस्ट के रूप में बढ़ता ही जाता है उसी तरह आपके पॉजिटिव हैबिट्स समय के साथ-साथ पढ़ते जाते हैं। 

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2) How Your Habits Shape Your Ideas (आपकी पहचान आपकी आदतों से बनती है।)

आमतौर पर बुरी आदतों के मुकाबले अच्छी आदतों को डेवलप करना मुश्किल होता है यही कारण है कि इस बात की ज्यादा पॉसिबिलिटी है कि आप फ्यूचर में भी इन बुरी आदतों को रिपीट करते रहेंगे। अच्छी हैबिट जैसे मेडिटेशन या जॉगिंग को कॉन्टिनिव रखना थोड़ा डिफिकल्ट होता है। 

लेकिन एक बार जब यह हैबिट बन जाती है तो यह हमेशा आपके साथ रहती हैं। बैड हैबिट के बनने का मेन रीजन यह है कि हम गलत चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं। बैड हैबिट को बदलने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी आइडेंटिटी में बदलाव करना। और ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि किसी हैबिट को बदलना तब तक बहुत मुश्किल होता है जब तक आप अपने अंदर बदलाव ना करें।  

आपको सबसे पहले यह डिसाइड करना होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं फिर उसके अकॉर्डिंग्ली छोटे-छोटे चेंज करने होंगे इसलिए आप का फोकस अपने आउटकम पर नहीं बल्कि आप किस तरह के इंसान बनना चाहते हैं  उस होना चाहिए। आपके सभी गोल तभी अजीब हो सकते हैं जब आप अच्छी हैबिट्स को डेवलप करते हैं 

आगे हम यही सीखेंगे की अच्छी हैबिट किस तरह से बनाई जाती हैं 

3) How to Build Better Habits (अच्छी आदतें कैसे बनाएं)

किसी भी हैबिट के बनने के 4 सिंपल प्रोसेस होते हैं .(Cue, Craving, Response and Reward)

  • Stage 1: Cues -यानि Signal जो हमारी ब्रेन के लिए ट्रिगर का काम करता 
  • Stage 2 : Craving– यह आप की आदतों के पीछे का मोटिवेशनल फाॅर्स है 
  • Stage 3 :Response – यही आपकी एक्चुअल हैबिट्स है 
  • Stage 4: Reward – यही आपकी हैबिट का एंड गोल होता है

इस तरह से Cue आपका ध्यान Reward की तरफ ले जाता है Craving जो इस Reward से रिलेटेड आपके अंदर डिजायर पैदा करती है और रिस्पॉन्स के जरिए आप उस रिवॉर्ड को हासिल करते हैं। 

इसे हम एक एग्जांपल के जरिए समझते हैं 

Cue– आपको फोन पर कोई नया विडिओ का नोटिफिकेशन आया 

क्रेविंग– आप उस विडिओ को देखना चाहते हैं 

रिस्पांस -आप फोन उठाकर विडिओ देखते हैं 

रिवॉर्ड– विडिओ देखने के बाद आपकी चाहत पूरी हो जाती हैं।  

आपने देखा होगा सारी बुरी आदतें आपको थोड़े समय के लिए pleasure से भर देती हैं। लेकिन धीरे -धीरे यही pleasure आपके दुखों का कारण बन जाता है।

ऑथर का कहना हैं कि अगर आपको कोई बुरी आदत छोड़नी है तो Stage 1 में ही संभल जाएँ। इसे एक स्मोकिंग करने वाले आदमी के example से समझते है 

जैसे आपके सामने कोई स्मोकिंग कर रहा है और आपका भी मन कर रहा पिने का तो आप वहा से दूर हो जाये। 

अगर cue मिल भी जाये तो desire को खत्म कर दें।

Desire होने भी लगे तो Response न दें बल्कि दूसरा काम करने लग जाएँ। 

इससे आप कभी भी उस आदत में नहीं फँसोगे।

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4) The Best Way to Start a New Habits (नई आदत शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका

सन 2001 में ब्रिटेन के रिसर्चर ने एक एक्सपेरिमेंट किया ताकि वे लोगों के अंदर एक बेहतर एक्सरसाइज हैबिट को डेवलप कर सकें। उन्होंने 248 लोगों को तीन ग्रुप में डिवाइड कर दिया। पहले ग्रुप को एक्सरसाइज करने के लिए कोई भी इंस्ट्रक्शन नहीं दिए गए दूसरे ग्रुप को मोटिवेशनल चीजें पढ़ने के लिए कहा गया था ताकि वह एक्सरसाइज के बेनिफिट के बारे में जान सकें। 

वहीं तीसरे ग्रुप को भी दूसरे ग्रुप की तरह ही इंस्ट्रक्शन दिए गए लेकिन साथ में यह भी जोड़ दिया गया कि वे अपनी एक्सरसाइज रूटिंग का एक रिकॉर्ड रखें। 
पहले और दूसरे ग्रुप में से सिर्फ 35-38% लोगों ने ही एक्सरसाइज किया जबकि तीसरे ग्रुप के 91% लोगों ने एक्सरसाइज किया। हैरानी यह थी कि मोटिवेशनल चीजें पढ़ने के बावजूद दूसरे ग्रुप और पहले ग्रुप के रिजल्ट में कोई खास फर्क नहीं था। 
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि वे कोई चीज इसलिए नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके अंदर मोटिवेशन की कमी है। दरअसल उनके अंदर मोटिवेशन कि कमी नहीं बल्कि क्लेरिटी कि कमी होती है। 

बहुत सारे लोग अपनी पूरी लाइफ इसलिए बर्बाद कर देते हैं क्योंकि वह हमेशा कुछ भी करने के लिए एक सही टाइम का इंतजार करते रहते हैं दरअसल आपको सही टाइम का इंतजार करने की नहीं बल्कि एक प्लान को फॉलो करने की जरूरत है। एग्जांपल के तौर पर आप इस तरह से एक प्लान बना सकते हैं जैसे कि मेडिटेशन- मैं हर दिन सुबह 8:00 बजे 20 मिनट के लिए मेडिटेशन करूंगा। एक्सरसाइज – मैं कम से कम हफ्ते में 3 दिन 1 घंटे के लिए जिम में एक्सरसाइज करूंग। स्टडी – मैं हर दिन  कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए जरूर पढ़ूंगा। 

5) अच्छी आदत बनाने का Formula  -Obvious, Attractive, Easy and Satisfying

हैबिट बनाने के 4 नियम है। 

Obvious 

इसे आसान और स्वाभाविक बनाने कि कोशिस करें 

Attractive 

इसे मजेदार बनाये 

Easy 

इसे आसान बनायें  

Goal को achieve करना के लिए easy बना लें।

इसके लिए पहले तो असंभव goal न रखें।

पहले ही दिन जिम जाकर 100 push – ups करने की न सोचें।

4 Satisfying 

इसे संतोषजनक (सटिसफयिंग) बनायें

जैसे आप ब्यायाम कर रहे है तो आप पहले ज्यादा मजबूत और फुर्तीला हो जायेँगे। इसमें आपको संतोष होना चाहिए। 

बुरी आदतों पर काबू पा रहे हो।

6) आपको Motivation की नहीं अच्छे Environment की ज़रूरत है।

एक प्राइमरी केयर फिजिशियन एनी ठंडाई को एक बार अजीब सा आईडिया या उन्हें यह भरोसा था कि बिना किसी मोटिवेशन या विल पावर वह अपने हॉस्पिटल के स्टाफ और विजिटर के ईटिंग हैबिट्स को बदल सकती हैं। इसके बाद उन्होंने और उनके साथियों ने मिलकर एक रिसर्च किया और हॉस्पिटल के कैफिटेरिया में एक्सपेरिमेंट किया। 

उन्होंने कैफिटेरिया के खाने पीने की चीजों की अरेंजमेंट को बदल दिया और ज्यादातर सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल को पानी से रिप्लेस कर दिया इस छोटे से चेंज के बाद बहुत ही सरप्राइजिंग रिजल्ट मिलें। अचानक से कैफिटेरिया में सॉफ्ट ड्रिंक की बिक्री बहुत घट गई और वाटर बोतल  की बिक्री बहुत बढ़ गई। 

इस बात से साबित होता था कि लोग आमतौर परचीजों को सिर्फ इसलिए नहीं चुनते है कि वह चीज क्या है बल्कि वह ऐसी चीजें इसलिए चुनते हैं क्योंकि वह आसानी से अवेलेबल होती है। 

हम अक्सर ऐसा सोचते हैं कि हमारा खुद पर बहुत अच्छा कंट्रोल है लेकिन रियालिटी इससे कहीं अलग है आपके आसपास का एनवायरनमेंट का आपकी लाइक और आपके बिहेवियर पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है

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7) Self -control करना सीखें

एक बार अगर अच्छी आदत लग जाए तो वो हमेशा याद रहती है। फिर भी हमारा दिमाग जल्द ही भटक जाता है। उदाहरण के तौर पर जब भी आप Weight loss की डाइट के दौरान कुछ मीठा देखते हैं तो, आपका self control खोने लगता है। कुछ लोग तो हार कर अपनी डाइट भी त्याग देते हैं।

इसलिए सेल्फ कंट्रोल बहुत जरूरी है। इसे बनाने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप ऐसी चीज़ो को अपनी नज़रों से दूर रखें जो आपको आप के गोल से दूर करती हो। 

 जो लोग अपनी बुरी आदतों को खत्म कर पाते हैं वे  ऐसे लोग होते हैं जो अपनी लाइफ को बेहतर तरीके से स्ट्रक्चर करते हैं। शार्ट में कहें तो वह अपनी बैड हैबिट के ट्रिगर यानी टेंप्टिंग सिचुएशन और एनवायरमेंट के बीच बहुत कम या ना के बराबर टाइम बिताते हैं 

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8) हैबिट को Unstable कैसे बनाये 

नोबेल प्राइज विनर निकोटिन गर्बन ने एक एक्सपेरिमेंटकरके यह बताया कि किस तरह हमारा दिमाग पहले से ही कई तरह के कंडीशन से भरा होता है। जैसे कि हजारों साल पहले खाने की तलाश में भटकते इंसान ऐसा खाना खाने की तलाश में रहते थे जिसमें शुगर और फैट भरपूर मात्रा में हो। और तब वह जितना खाना खा सकते थे उतना खा लेते थे। क्योंकि उन्हें पता नहीं होता था कि अगली बार खाना कब मिलेगा। 

हालांकि आज हमारे आस-पास खाने की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी हमारा दिमाग अपनी पुरानी सोच को लेकर कंडीशन है और इसी बिहेवियर का फायदा उठाकर फास्ट फूड कंपनीज और एडवरटाइजिंग कंपनीज खाने को और ज्यादा से ज्यादा अट्रैक्टिव बना कर हमारे सामने पेश करती हैं

9) परिवार और दोस्तों का आपकी आदतों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

इंसान एक तरह के हर्ड एनिमल्स है यानी कि झुण्ड के पशु है। आप हमेशा किसी झुण्ड में फिट होना चाहते हैं .दूसरों के साथ अच्छे रिलेशन बनाना चाहते हैं ताकि आप अपने कलीग और पार्टनर की रिस्पेक्ट हासिल कर सके। 

चार्ल्स डार्विन ने कहा था के मानव जाती की सबसे लंबी हिस्ट्री में जिन लोगों ने सबसे इफेक्टिव तरीके अपनाना और सहयोग करना सीखा वही सबसे ज्यादा सक्सेसफुल हुए हैं। इसका मतलब है कि किसी से जुड़ना हम इंसानो के गहरे डिजायर में से एक है और इसलिए हम अपने हैबिट को बनातें नहीं बल्कि नकल करते हैं। 

हम हमेशा ऐसी हैबिट  को फॉलो करते हैं जिन्हें हमारे कल्चर में नॉर्मल समझा जाता है क्यूंकि कि हम अपने कल्चर का एक हिस्सा बने रहना चाहते हैं हम उसको फॉलो करते हैं जो हमारे फ्रेंड फैमिली स्कूल सोसाइटी द्वारा सौंपी गई है। और हम वही सीखते है जो हमारे अस पास के लोग सीखते है। 

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10). बुरी आदतों का कारण कैसे खोजें और उसे कैसे बदलें।

जैसे किसी अच्छी आदत के रिजल्ट के बारे में सोचना उससे Attractive बनाते है, वैसे ही किसी बुरी आदत के result के बारे में सोचना उसे Unattractive बनाते है। 

इसीलिए अपने दिनचर्या पर ध्यान दें और ऐसी आदतों को खोज निकालें जो आपका समय बर्बाद करती हैं। फिर उन आदतों के results पर विचार करें और उन्हें बदल दें।आप जिस हैबिट को छोड़ना चाहते है उसे Unattractive बनाये। 

11) बेशक धीरे चलें लेकिन हमेशा आगे बढ़ते रहें 

जेरी उलसमेन फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के फिल्म फोटोग्राफी के एक प्रोफेसर थे एक दिन उन्होंने अपने स्टूडेंट को दो ग्रुप में डिवाइड कर दिया उन्होंने पहले ग्रुप को Quantity ग्रुप और दूसरे ग्रुप को Quality  ग्रुप का नाम दिया। पहले ग्रुप को कहा गया कि वह जितनी ज्यादा फोटो क्लिक करेंगे उसके बेसिस पर उन्हें ग्रेड मिलेंगे वहीं दूसरे ग्रुप को सिर्फ एक सबसे अच्छी फोटो क्लिक करने के लिए कहा गया और उस फोटो की क्वालिटी के बेसिस पर उनके ग्रेड मिलेंगे। 

फैशन के लास्ट में वह यह देखकर हैरान रह गए इस सबसे अच्छी फोटोस पहले ग्रुप ने ली थी पहले ग्रुप के स्टूडेंट अपनी फोटो के साथ एक्सपेरिमेंट करते गए और लाइटिंग लोकेशन और सीनरी को बेहतर करते रहे। जिससे उनकी स्किल हर बार पहले से बेहतर हो गई। 

वहीं दूसरा ग्रुप सिर्फ एक अच्छी फोटो लेने के लिए ही बैठा रहा इसलिए उनके पास अपना काम दिखाने के लिए कुछ ज्यादा नहीं था। 

लाइफ में कुछ चेंज लाने के लिए सबसे अच्छे सॉल्यूशन को ढूंढने में उलझना आसान है जैसे -सबसे तेजी से वजन कम करने का आईडिया, 

मसल्स -बनाने का सबसे अच्छा प्रोग्राम, साइड बिजनेस-बनाने का सबसे अच्छा ऑप्शन हम सबसे अच्छी ऑप्शन  पर इतना सारा ध्यान देते हैं कि हम कभी भी इस पर काम नहीं कर पाते। 

मोशन में होना और रियल में ऐक्शन लेने में बहुत डिफरेंस होता है जैसे कि जब आप कुछ लिखने की सोचते हैं तो यह बस एक मोशन है अगर आप पैन और पेपर उठाकर लिखने बैठे हैं तब असल में यह एक एक्शन होता है 

लोग चाहते तो है बहुत कुछ करना लेकिन उसके  एक्शन नहीं लेते।  

ज्यादातर लोग कुछ करने से पहले वह लोग हर तरह की नॉलेज लेते हैं उसके लिए स्टडी करते हैं। तरह-तरह के आईडिया लेते हैं और एक परफेक्ट बनाने के लिए सोचते हैं, लेकिन वह कभी एक्शन नहीं लेते हैं। तो एक्शन लेना भी बहुत जरूरी है क्योकि जब तक आप एक्शन नहीं लेंगे कोई प्लान सक्सेस नहीं होगा।

क्योकि आपको पता ही है आज भी जो  बड़ी-बड़ी कंपनियां है वह एक टाइम पर बहुत छोटी थी। और आज वह इतनी बड़ी ब्रांड बन गई है। तो आप भी ऐसा ना सोचे कुछ करने से पहले छोटे-छोटे स्टेट में एक्शन ले और कुछ करने की कोशिश करें।  ये अपने आप परफेक्ट बनते जाएगा टाइम के साथ। 

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12) Least Effort  का नियम 

हमारा दिमाग ऐसा डिजाइन है कि हम आसान चीजें करना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इसमें हम एनर्जी सेव करते हैं और हमारा दिमाग मुश्किल काम करने से पीछे हटता है। हमारा दिमाग हर समय कुछ एनर्जी बचाना चाहता है। जिस चीज में जितना ज्यादा एनर्जी लगती है हम वह काम उतना ही कम करते हैं और लगभग करना ही नहीं चाहते हैं। 

 जैसे कि मान लीजिए आप हर दिन 100 पुश अप करने का गोल बनाते हैं तो आप ज्यादा दिन तक कंटिन्यू नहीं कर पाएंगे वहीं अगर आप हर दिन बस 20 पुश अप का गोल बनाते हैं तो आप काफी लंबे टाइम तक इसे कंटिन्यू रख पाएंगे। 

अब सवाल यह उठता है कि अगर हम इतने ही आलसी हैं तो  दुनिया में इतने सारे लोग इतने सक्सेसफुल कैसे बन पाते हैं। तो इसका जवाब यह है कि हर किसी को अच्छे और बुरे दिन का सामना करने पड़ते हैं लेकिन आपको यह इंश्योर करना होता है कि अपने सबसे बुरे दिनों में भी आप अपने काम को करना जारी रखें और जितना हो सके इसके बीच लगने वाली मुश्किलों को कम करें।  यहाँ आईडिया यह नहीं है कि आप आसान काम करें बल्कि यह है कि आप मुश्किल काम को भी आसान बना दें। 

13) टाल मटोल  दूर करने का 2 मिनट रूल 

हम लोग हमेशा कुछ बड़ा करना चाहते हैं या फिर कुछ नहीं करते। हम बहुत ही कम टाइम में बहुत ज्यादा करने की कोशिश करते हैं। इसलिए हमारे लिए कोई भी काम लगातार करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए आप 2 मिनट रुल अपना सकते हैं। 

इस नियम से टालमटोल को दूर कर सकते है ये नियम कहता है कि जब आप कोई काम शुरू करना चाहते है तो बहुत ज्यादा करने कि कोसिस न करे। 

इसे एक एग्जांपल से समझते है जैसे आपको कोई किताब पढ़नी है तो पुरो किताब ख़त्म करने कि न सोचे बल्कि ये कहिये 2  मिनट पढ़ लेता हु। 

Exercise का मन न हो तो Brain को बोलें चलो 2 minute कर लो।

 3 किलोमीटर तक दौड़ने की बजाय सिर्फ अपने रनिंग शूज पहने।

कोई भी है हैबिट बेकार है अगर आप उसे महीने में सिर्फ 1 दिन के लिए करें और बाकी के 29 दिन उसे छोड़ दें। जितना हो सके किसी भी हैबिट को उतना अट्रैक्टिव और इजी बनाने की कोशिश करें। 

 2 मिनट रूल कुछ लोगों को मजाक जैसा लग सकता है ,आपको लगे कि आप खुद को बेवकूफ बना रहे हैं कोई भी एक पेज पढ़ने या 1 पुश अप करने की इच्छा नहीं रखता दरअसल यह किसी भी हैबिट को शुरू करने और डिवेलप करने का बस एक टूल हैं।  शुरू में यह कोशिश करें कि कोई भी चीज बस 2 मिनट के लिए करें और फिर आप देखेंगे कि आप करते जा रहे हैं। 

14) व्यवहार परिवर्तन का मुख्य नियम।

हम कुछ भी करते हैं उसके पीछे हमारा एक मकसद होता है जैसे जानवर शिकार करते हैं तो उन्हें खाना तुरंत मिल जाता है। उन्हें अपने एक्शंस का गारंटीड रिजल्ट मिलते हैं। 

लेकिन हम इंसानों के साथ ऐसा नहीं है। हमें किसी भी चीज का रिजल्ट तुरंत नहीं मिलता लेकिन हमारा दिमाग अभी तक डिले रिजल्ट को इंजॉय करने के लिए इवॉल्व नहीं हुआ है लेकिन आप अपने माइंड को ट्रेन कर सकते हैं और डिले  ग्रिटिफिकेशन को एक्सेप्ट कर सकते हैं इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि जैसे ही आप कोई काम करें तुरंत अपने आपको कोई अच्छा सा रिवॉर्ड दें। 

एग्जांपल के तौर पर आप अपने आप से कमिटमेंट कर सकते हैं कि अगर आप 30 मिनट तक एक्सरसाइज करते हैं तो आप अपने पसंद के शो का एक एपिसोड देख सकते हैं। 

16) हर रोज़ अच्छी आदतों से कैसे जुड़े रहें।

यदि आप अपने हैबिट से चिपके हुए रहना चाहते हैं उसको छोड़ना नहीं चाहते हैं तो आपको उस हैबिट ट्रैक करना बहुत जरूर हैं। यदि आप कोई नई आदत बना रहे हैं या छोड़ रहे हैं तो क्या आप यह रोजाना कर रहे हैं या नहीं। इसके लिए आप हैबिट ट्रैक्टर का इस्तेमाल कीजिए और जिस दिन टास्क खत्म करते हैं उस पर एक क्रॉस बा दें। 

इसके लिए आप कोई भी एक कैलेंडर या नोटबुक ले सकते हैं। अपनी आदतों पर नज़र रखना अपने आप में एक आकर्षक और संतोषजनक आदत है। हैबिट ट्रैकिंग एक सिंपल और इफेक्टिव टेक्निक है इसके इस्तेमाल से आप अपने आदतों पर नजर रख सकते हैं और यह काम भी करता है मैंने खुद इसको ट्राई किया था 

समाप्त।

तो दोस्तो, ये थी Atomic Habit की book summary ( Atomic Habit book summary in Hindi )

आप कौन सी बुरी habit छोड़ना चाहते हो। या नयी हैबिट बनाना चाहते हो ?

नीचे comment में जरूर बताएँ।

और उसके लिए कौन सा ट्रिक use करेंगे।

ब्लॉग को share, like और subscribe करके प्रोत्साहन भी दें।
क्युँकि book summary बनाने में काफी मेहनत लगती है।

धन्यवाद।

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