The Body Keeps The Score Hindi Book Summary

अगर किसी के साथ कभी कोई Trauma वाली घटना (जैसे चोरी , abuse, हिंसा, स्टॉक में loss आदि ) हो जाये तो victim डिप्रेशन में चले जाते हैं। इससे उनकी लाइफ से ख़ुशी गायब हो जाती है। इसे PTSD (post traumatic stress disorder ) भी कहते हैं।

लेकिन इस किताब को पढ़कर आपको पता चलेगा कि Trauma से कैसे उबर सकते हैं। और फिर से खुशियों भरी life कैसे जी सकते हैं।

The body keeps the score

Author : Bessel van der Kolk

The Body Keeps The Score (Summary in Hindi)

1) Antidepressants Are Not Enough

बहुत से psychologists , डिप्रेशन के मरीजों को anti – depressants (दवाई) देते हैं। इससे समाज के लोगों को लगता है कि दवाई तो चल रही है अब victim अपने -आप ठीक हो जायेगा।

लेकिन लेखक कहते हैं कि दवाई के बाबजूद समाज को depressed person को moral support देते रहना चाहिए।

ऐसी language का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे depression में जी रहे व्यक्ति को नयी प्रेरणा मिले। कुछ लोग समझाने के चक्कर में डाँटने लग जाते हैं। ऐसा कभी न करें।

इसके अलावा Trauma या डिप्रेशन वाले व्यक्ति को normal life जीने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ छोटे – मोटे काम करके खुद को व्यस्त रखना चाहिए। योग , meditation, exercise आदि करते रहना चाहिए। और खुद को अकेला नहीं रखना चाहिए।

2) Our Understanding of Trauma

अगर किसी के past में कोई painful घटना होती है तो वह victim के दिमाग में देर तक याद रहती है।

आगे चलकर Victim को बार -बार उसकी याद आने लगती है। और इससे वे normal life नहीं जी पाते। उन्हें चिंता, तनाव और अवसाद (depression) होने लगता है।

उनके subconscious brain में एक डर बैठ जाता है। वे reality और imagination में कोई अंतर नहीं कर पाते। वे अपनी कल्पना में बुरी चीज देखते हैं और उन्हें लगता है कि वह उनके साथ real में हो रहा है। इससे वे हर पल बुरी तरह डरे हुए रहते हैं।

साथ ही dissociation पैदा हो जाती है। वे समाज के लोगों पर trust नहीं कर पाते। और खुद को अकेला और असहाय समझने लगते हैं। उन्हें लगता है उनकी जिंदगी में खतरा ही खतरा है। और किसी भी समय, कोई भी व्यक्ति उनके साथ फिर से वैसा कर देगा।

इसलिए किसी भी psychologist को Trauma से गुजर रहे व्यक्ति के इन symptoms पर ध्यान देना चाहिए। और ऐसे thought patterns को समझना चाहिए। फिर Victim की इन thought patterns को बदलने में
help करनी चाहिए। ताकि वह फिर से reality में वापस आये। और परिवार व् समाज से associate कर सके।

3) Trauma Affects Relationships

Trauma से व्यक्ति की relationships पर भी बुरा असर पड़ सकता है। Trauma का Victim depression में रहता है और धीरे -धीरे उसे शराब या सिगरेट आदि की भी आदत पड़ जाती है।

वह किसी पर भी trust नहीं करता। और किसी को अपने मन की बात नहीं बताता। उसे लगता है दूसरे उसके दुःख से खुश होंगे। कई बार तो वह अपन साथ हुई बुरी घटना के लिए भी खुद को जिम्मेवार मानने लगता है।

इस सब से उसके दोस्त और lovers आदि उससे दूर होने लगते हैं। वे उसका व्यवहार समझ नहीं पाते। उन्हें लगता है वह एक बुरा आदमी बनता जा रहा है।

क्युँकि वह खुश भी नहीं रहता इसलिए लोग ऐसे व्यक्ति से दूर होने लगते हैं। इससे Trauma Victim की situation सुधरने के वजाय और खराब होने लगती है।

4) Therapy Can Treat Trauma

Therapy से Trauma का उपचार किया जा सकता है। दरअसल जब भी हमारे सामने कोई danger होता है तो हमारी body और Brain दोनों fight या flight मोड में आ जाते हैं। जिसका मतलब है लड़ो या भाग जाओ।

लेकिन Trauma से गुजरने के बाद भी, ऐसे लोगों में fight या flight मोड बना रहता है। हालाँकि वहाँ कोई खतरा नहीं होता। ऐसे में वह व्यक्ति कभी गुस्से का अनुभव करता है तो कभी घबराहट का। और इस सबसे वह हमेशा विचलित रहता है।

इसलिए हर Trauma Victim की समय रहते किसी अच्छे psychologist से therapy करवानी चाहिए।
EMDR ( eye movement desensitization and reprocessing ) नाम की तकनीक से Trauma को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसे Therapist ही अच्छे से कर सकते है।

5) Keep Taking Action

Trauma होने से हमारे शरीर में stress के hormones हमेशा निकलते रहते हैं। जो हमारे ब्रेन के prefrontal cortex को block कर देते हैं। यह भाग हमें decision making और सोचने -समझने में help करता है।

लेकिन block हो जाने पर हमारा दिमाग ठीक से सोचना ही छोड़ देता है।

इसके अलावा amygdala और limbic system पूरी गति से काम करने लगते हैं। जिससे victim के अंदर
emotions की आँधी सी उठती रहती है।

देखने वाले को ऐसा आदमी बाहर से normal ही लगेगा। लेकिन अंदर से वह इतना unstable होता है कि आवेश में कोई गलत कदम भी उठा सकता है।

Brain scan से पता चला है कि अगर Trauma वाला आदमी कुछ action करता रहे, तो उसका दिमाग ठीक से काम करने लगेगा।

सबसे easy task है योग और मैडिटेशन। आँखें बंद करके ऐसे व्यक्ति को ईश्वर या divine power का ध्यान करना चाहिए। या ऐसी memories को याद करना चाहिए जब वह बेहद खुश था। या जब उसने कुछ achieve किया था।

इससे उसके अंदर stress hormones रिलीज़ होना बंद हो जायेंगे और वह कुछ हद तक Brain को normal stage में रख पायेगा। इसमें टाइम लग सकता है। लेकिन कोशिश करते रहनी होगी।

इसके अलावा self help books पढ़ना भी बहुत लाभ दे सकता है। क्युँकि इससे दिमाग busy हो जाता है। और बुरी घटना से उसका ध्यान हट जाता है। नया ज्ञान तो प्राप्त होता ही है।

6) Mindfulness Helps

Trauma का Victim अक्सर mindful नहीं रहता। अर्थात उसके बहुत से response automatic हो जाते हैं। और वह logic नहीं लगा पाता।

जैसे तेज आवाज से डर जाना, अकेले बैठने में भी घबराना आदि। उसे लगता है कि वह घटना उसके साथ अभी भी हो रही है।

इसलिए therapist को उसे mindfulness सिखानी चाहिए। उसे समझाना चाहिए कि past में न जीकर Future के बारे में सोचे।

यह पूछना चाहिए कि आज से 5 साल बाद आप कहाँ होंगे ? इससे victim को सोचने में मदद मिलेगी कि सच में उसका Future कैसा होगा। क्या पॉंच साल बाद भी वह हमेशा चिंता में बैठा रहेगा। या अपने talent के दम पर आगे बढ़ जायेगा।

उसकी Goal बनाने में help करनी चाहिए। जैसे वह एक restaurant लगा सकता है। उसमें जरूरतमंद लोगों को जॉब दे सकता है। बहुत से पैसे कमा कर अपने लिए घर ,गाड़ी आदि ले सकता है। चैरिटी या समाजसेवा कर सकता है। आदि।

इस तरह Victim के पास एक Goal होगा तो उसके दिल में नयी Hope भी जागेगी। दोस्तो, अगर आप खुद ही किसी Trauma से गुजर रहे हों तो इस सब की सहायता से खुद को संभालें।

7) Childhood Trauma Damages Personality

जिन बच्चों को बचपन में किसी तरह का abuse झेलना पड़ता है उनके ब्रेन पर इसका बुरा असर पड़ता है।
ऐसे बच्चे आगे चलकर कम दयालु होते हैं। उनमें criminal वाली psychology बन जाती है।

क्युँकि वे दूसरों पर अपना trust खो देते हैं। और हमेशा offensive मोड में रहते हैं। उन्हें लगता है कि समाज शायद ऐसे ही काम करता है। वे सोचते हैं कि जिस तरह दूसरों ने उन्हें पीड़ा पहुँचाई है, उसी तरह उन्हें भी करना होगा। वे इसे जीने का नियम मान लेते हैं।

इस तरह की सोच से बच्चों का विकास भी नहीं हो पाता। वे पढ़ाई में भी अच्छे नहीं होते।

इसलिए समय रहते ही abuse के शिकार हुए बच्चे की therapy या कॉउन्सिलिंग होनी चाहिए। इससे उस बच्चे की सोच को फिर से positive किया जा सकता है। और वह फिर से एक सामान्य जिंदगी गुजार सकता है।

8) Memories Of Trauma Are Disorganized

हमारी positive memories का एक प्रॉपर structure होता है। एक कहानी की तरह हर memory की एक beginning , middle और end होता है।

इसके विपरीत Trauma वाली memories का कोई structure नहीं होता। Victim के दिमाग में ऐसी memory अक्सर flashes की तरह आती हैं। इससे Victim का Brain इसे danger मान लेता है। और उसमें stress हॉर्मोन निकलने लगते हैं। जिससे उसके अंदर बहुत से negative emotions आने लगते हैं।

या तो वह खुद को नुक्सान पहुँचाने की कोशिश करता है या दूसरे को नुकसान पहुँचाने की सोचता है।

इन memories को दिमाग से हटाने की कोशिश करनी चाहिए। Victim को अपने subconscious brain से बात करनी चाहिए। और कहना चाहिए कि यह सब past की घटना है। और मैं धीरे -धीरे इसे भुला रहा हूँ।

साथ ही ईश्वर को धन्यवाद करना चाहिए कि उनकी जान तो सही सलामत है। क्युँकि विश्वास खो देने से victim
को नुक्सान ही होगा।

यह भी सोचें कि Ukraine के लोगों ने भी बहुत ज्यादा Trauma देखा होगा। लेकिन यह सिर्फ एक reference के तौर पर लेना चाहिए। क्युँकि हर किसी का दर्द , दर्द ही होता है। लेकिन ऐसी सोच से अपने दर्द को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

9) Balance Emotions With Rational Thoughts

अपने emotions को logic के आधार पर analyse करना चाहिए।

Victim को सोचना चाहिए कि जो बुरा होना था वह हो चुका है। और बार -बार उसे याद करके मेरे शरीर में stress हॉर्मोन ही निकलेंगे। जिससे अवसाद बढ़ेगा।

इसके वजाय positive affirmations का सहारा लेना चाहिए और खुद से ये कहते रहना चाहिए –

  • मैं फिर से कोशिश कर रहा हूँ और धीरे -धीरे फिर से खुशहाल जिंदगी की ओर लौट रहा हूँ।
  • पेड़ की टहनियों को काट भी दिया जाये तो वह फिर से ऊगा लेता है। मैं भी दुबारा bounce back कर लूँगा।
  • मेरा past में जो भी हुआ हो, लेकिन मैं अपने Future को अपने हाथों से बनाऊँगा।
  • जिंदगी में अच्छे -बुरे मौसम आते रहते हैं। और बुरा वक़्त भी हमेशा नहीं रहता। रात के बाद सुबह होती ही है।

इस तरह की सोच से Victim खुद को दर्द और Trauma से उबारने की कोशिश कर सकता है।

10) The Distraction Technique

Trauma इसलिए भी Victim को ज्यादा प्रभावित करता है क्युँकि Victim बार -बार उस घटनाक्रम को याद करता रहता है। और उसके बाद गुस्सा या अफसोस करता है।

लेकिन इसके लिए हमेशा Distraction Technique लगानी चाहिए। जिसका मतलब है कि बुरे विचार आते ही आप Brain को किसी तरह distract करें।

कोई गाना गाइये। Exercise कीजिये। दोस्त से बात कीजिये। कोई self help बुक पढ़िए जैसे कि इस blog
पर आपको मिल जाएँगी।

बस यह रूल बना लीजिये कि दिन में एक बार भी Trauma के बार में सोचेंगे ही नहीं। बल्कि positive affirmations बोलते रहेंगे और distraction technique से नेगेटिव विचारों को दूर रखेंगे।

कुछ समय बीतने पर आप खुद ही उन घटनाओं को भूलने लगेंगे।

साथ ही self – compassion का इस्तेमाल जरूर करें। जिसका मतलब है खुद से प्यार करें। आपके साथ जो हुआ उसके जिम्मेवार आप बिलकुल नहीं हैं।

आप जैसे भी हैं – गोरे, काले , पीले, मोटे, छोटे, लम्बे, आदि – बस खुद को accept करें। खुद से प्यार करें। क्युँकि आप को कोई भी replace नहीं कर सकता। आपके परिवार की हेल्प सिर्फ आप ही कर पाओगे। साथ ही कोई किसी से माँग कर नहीं खाता। बल्कि लोग खुद मेहनत करके अपनी जीविका कमाते हैं।

हमेशा याद रखें यह धरती सबकी है। और सूर्य की रौशनी भी सबके लिए है। इसलिए खुद को कभी हीन न मानें। बल्कि खुद से प्यार करते रहें।

समाप्त।

दोस्तो, उम्मीद है The Body Keeps The Score summary in Hindi पढ़कर आपको पता चला होगा कि बुरी घटनाओं से होने वाले Trauma से आप खुद को कैसे उबार सकते हैं। ज्यादा problem होने पर therapist की हेल्प जरूर लें। कृपया इस पोस्ट को share भी जरूर करें। धन्यवाद।

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