कर्मों का फल

एक बार कृष्ण और अर्जुन ब्रह्माण  के भ्रमण पर निकले और ब्रह्माण  के लोगो के कार्यकलापों को देख रहे थे | तभी उनकी नज़र एक हलवाई की दुकान पर पड़ी हलवाई ने पुराना बासा खाना दुकान के पास में इक्कट्ठा कर रखा था | उस खाने के ढेर को देख एक कुत्ता बार- बार उसे खाने आता लेकिन हलवाई उसे पत्थर मार के भगा देता | कुत्ता जोर-जोर से रोता और फिर खाने आता, उसे फिर हलवाई भगा देता |

 यह देख कर अर्जुन को दुःख हो रहा था लेकिन कृष्ण हँस रहे थे | तब अर्जुन ने आश्चर्य से उनके हँसने का कारण पूछा | तब कृष्ण ने कहा – अर्जुन ! यह दुकान एक नामी हलवाई की थी | उसने अपने इस काम से बहुत धन कमाया था पर उसका नौकर चाकर और नाते रिश्तेदारों से बहुत गंदा बर्ताव था | वो सभी की बहुत बेइज़्ज़ती करता था | ये कुत्ता वही नामी हलवाई हैं और इस दुकान का वर्तमान मालिक उसी का बेटा हैं जो अपने ही पिता को पत्थर मार रहा हैं | ये जो भी इस कुत्ते के साथ हो रहा हैं ये उसके पिछले जन्मों का फल हैं |

इन्सान को अपने कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए वो हर जन्म में अपने कर्मों का भोग करता ही हैं |

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